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देश की सुरक्षा व्यवस्था पर तमाचा क्यों?

आज देश में अमेरीका के राष्ट्रपति का आगमन हुआ है और इससे पहिले सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जुम्मेदारी अमेरीका के सुरक्षा दस्तों ने अपने हाथों में ले ली है। हमारे देश के महत्वपूर्ण हिस्सों में भी आज अमेरीका के सुरक्षा दस्तों का कब्जा है और उस पर विभिन्न तरीकों से निगरानी की जा रही है। अब सवाल है कि क्या हमारे देश के राजनेताओं को याद नहीं कपड़े उतारने वाली घटनाऐं। या अमेरीका के आगे झुके पड़े हैं ये बेशर्म अथवा देश को गुलाम बनाने की कोई बड़ी साजिश है?
हमारे सुरक्षा बलों को दुनिया के उच्च स्तर के सुरक्षा दस्तों में गिना जाता है। तो फिर हमारे ही देश में हमारे सुरक्षा दस्तों के ऊपर अमेरीका के इन सुरक्षा दस्तों को तैनात करने का क्या औचित्य है? इससे यह तो माना ही जा सकता है कि हमारे सुरक्षा दस्तों का मनोबल तोडऩे की एक बड़ी साजिश पर्दे के पीछे चल रही है।
अगर हम कुछ माह पूर्व अमेरीका के उच्च अधिकारियों की पाकिस्तान की यात्राओं को ध्यान में रखों तो वहां पर भी पहिले सुरक्षा के नाम पर सुरक्षा बलों को अमेरीका ने तैनात किया और धीरे-धीरे उसके महत्वपूर्ण हिस्सों में आज भी तैनात हैं पूर्ण कब्जे के साथा और पूरा दबाव बनाये हुये हैं ये अमेरीका के सुरक्षा बल पाकिस्तान सरकार पर! क्या यह उसही तरह की यात्रा के रूप में तो नहीं है? जिसे हमारा मीडिया और सरकार दो महाशक्तियों का मिलन बता रहा है लेकिन वास्तव में हमारी पूरी सुरक्षा व्यवस्था ही अमेरीका के हाथ में है? हमें विचार तो करना ही है और पूरे घटनाक्रम पर नजर भी रखनी ही है। लेकिन अफगानिस्तान के बाद पाकिस्तान, अब भारत का नम्बर आना तो निश्चित ही है।
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